পিতৃ তর্পণের মন্ত্র
ওঁ তদবিষ্ণুঃ পরং পরং সদা পশ্যন্তি সুরয়ঃ দিবীব চহ্মুরাততম । { আচমন }
ওঁ অপবিত্রঃ পবিত্রঃ সর্ব অবস্থাং গতহোপি বা , য স্মরেৎ পণ্ডরিকাখং স বাহ্যন্তরঃ শুচিঃ। { জল ছিটা }
দেবদেব জগন্নাথ শঙ্খ চক্র গদাধর দেহি বিষ্ণুহনুআঙ্গাং তীরথেনব্রগাহন ।
এতে গন্ধপুস্পে ওঁ গণেশায় নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে ওঁ শিবাদি পঞ্চ দেবতাভ্য নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে ওঁ আদিত্যাদি নবগ্রহভ্য নমঃ এতে গন্ধপুস্পে ওঁ ইন্দ্রাদি দশদিকপালেভ্য নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে ওঁ যজ্ঞেশ্বর শ্রী বিষ্ণুবে নমঃ ওঁ এতৎ ভুস্বামী গদাধরা নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে ওঁ শ্রী গুরুবে নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে ওঁ গঙ্গায়ৈ নমঃ , ওঁ বাস্তু পুরুসায় নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে গয়াতীরথায় নমঃ , এতে গন্ধপুস্পে সর্ব দেবায়ভ্য নমঃ , এতে গন্ধ পুষ্পে সর্ব দেবীভ্য নমঃ ,
এই বলিয়া প্রত্যেক কে ধুপ দীপ নৈবেদ্য যথা শক্তি পুজা করিবে ।1. ॐ कुलदेवतायै नम: (21 बार) ।
2. ॐ कुलदैव्यै नम: (21 बार) ।
3. ॐ नागदेवतायै नम: (21 बार) ।
4. ॐ पितृ दैवतायै नम: (108 बार) ।अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्। नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा। सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा। तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा। द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्। अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि:।।
प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च। योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु। स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा। नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्।।
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्। अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत:।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:। जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण:।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:। नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज।।

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